: कोरबा महापौर राजकिशोर प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र निरस्त, शहर की राजनीति में मचा हड़कंप!
Vivek Sahu
Fri, Aug 23, 2024
कोरबा( न्यूज उड़ान )कोरबा नगर पालिक निगम के महापौर राजकिशोर प्रसाद के जाति प्रमाण पत्र को आदिम जाति विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने निरस्त कर दिया है।
इस फैसले से कोरबा की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लेकिन एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है: उस समय पदस्थ एसडीएम ने स्थायी प्रमाण पत्र जारी कैसे कर दिया था? और अब, इस गलती के लिए उन पर और इसमें शामिल संबंधित कर्मियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
महापौर का भविष्य अधर में: कांग्रेस के महापौर राजकिशोर प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद शहर की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है।
नगर निगम चुनाव में अभी करीब 5 माह का समय बाकी है, लेकिन इस निर्णय ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या श्री प्रसाद इस स्थिति में आगामी 5 महीने तक महापौर के पद पर बने रह पाएंगे? अभी तक उनके रुख के बारे में कोई स्पष्टता नहीं आई है, क्योंकि उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।
दूसरी ओर, भाजपा इस मौके का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है और चाहती है कि महापौर की कुर्सी से श्री प्रसाद को हटाकर उनकी जगह भाजपा से किसी को महापौर मनोनीत किया जाए।
लेकिन इस प्रक्रिया में वैधानिक और संवैधानिक अड़चनों को पार करने में 2 से 3 महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद नया महापौर भी केवल दो से ढाई महीने के लिए ही हो सकता है।
राजनीतिक दांवपेच: भाजपा की ओर से महापौर पद के लिए खींचतान शुरू हो सकती है, जिससे पार्टी के भीतर विवाद उत्पन्न हो सकता है। इस बीच, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश शुरू कर दी है।
यह भी संभव है कि राजनीतिक सहमति के तहत श्री प्रसाद को निगम चुनाव की आचार संहिता लागू होने तक महापौर के पद पर बने रहने दिया जाए।
6 दिसंबर 2019 को कोरबा के अनुविभागीय अधिकारी ने राजकिशोर प्रसाद के पक्ष में 'कोयरी' या 'कोइरी' जाति के अन्य पिछड़ा वर्ग का स्थायी सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र जारी किया था। यह जाति बिहार प्रांत में पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आती है, लेकिन प्रमाण पत्र छत्तीसगढ़ में हरदी बाजार तहसील से जारी किया गया था, जो कि एक अस्थायी प्रमाण पत्र के आधार पर था।
उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के अनुसार, विजिलेंस सेल की रिपोर्ट, गवाहों के बयान और प्रस्तुत दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि धारक अपनी सामाजिक प्रास्थिति को प्रमाणित करने में असफल रहे। इस आधार पर, समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 6 दिसंबर 2019 को जारी ‘कोयरी’ या ‘कोइरी’ जाति का स्थायी सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया जाए।
कलेक्टर कोरबा को भी निर्देश दिया गया है कि वे छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 और अन्य सुसंगत प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
यह मामला न केवल प्रशासनिक गड़बड़ियों को उजागर करता है, बल्कि आने वाले नगर निगम चुनावों के पहले राजनीतिक दांवपेचों का भी एक संकेत है।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह प्रकरण कौन सी नई राजनीतिक दिशा लेता है।Tags :
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