: कोरबा पुलिस द्वारा नए कानूनों के लागू होने पर थानो में मनाया गया महोत्सव
Mon, Jul 1, 2024
कोरबा( न्यूज उड़ान) दिनांक 01/07/2024 को संपूर्ण भारत में नया क़ानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हो गया है। जिसके प्रचार प्रसार के लिए पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश अनुसार सभी थाना/ चौकी/पुसके प्रभारियों के द्वारा इस दिवस को महोत्सव की तरह मनाया गया।
सभी थानो में जनप्रतिनिधि, पार्षद, सरपंच गणों और आमजनता की उपस्तिथि में पुलिस अधिकारियों के द्वारा नवीन क़ानून के प्रमुख प्रावधानों के बारे में बताया गया।
थाना कटघोरा में कार्यक्रम के उपलक्ष्य में विधायक कटघोरा माननीय श्री प्रेम चंद पटेल जी उपस्तिथ हुए। उसी प्रकार थाना करतला में विधायक रामपुर माननीय श्री फूल सिंह राठिया जी ने कार्यक्रम को सुशोभित किया।
थाना कोतवाली में महापौर माननीय श्री राजकिशोर प्रसाद की गरिमामय उपस्तिथि में कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें पुलिस अधीक्षक महोदय स्वयं उपस्तिथ रहे।
ज्ञात हो कि आज दिनांक से नये क़ानून लागू हो गये है, जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली एक नये युग में प्रवेश कर रही है जो देश की न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाएंगी।
भारतीय न्याय संहिता का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार करना है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को भी सुनिश्चित करती है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों की मान्यता और प्रामाणिकता से संबंधित है। आज से जीरो और ई FIR भी रजिस्टर कराई जा सकेगी एवं सभी प्रक्रिया में निर्धारित समयसीमा लागू हो जाएगी।
: अंग्रेजों के समय का कानून बदलना जरूरी- हितानंद।
Mon, Jul 1, 2024
कोरबा( न्यूज उड़ान )भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू होने के अवसर पर बालको नगर थाने में थाना प्रभारी अभिनव सिंग जी के सफल नेतृत्व में जागरूकता संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में समाज के प्रबुद्ध जनों, राजनीति से जुड़े लोगों एवं आम नागरिकों को आमंत्रित किया गया।
नए भारत का नया कानून कार्यक्रम के दौरान नए कानूनो के बारे में पुलिस अधिकारियों द्वारा उपस्थित नागरिकों को जानकारी प्रदान की गई। उक्त कार्यक्रम के दौरान नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल ने कहा कि भारत तो आजाद हो गया लेकिन भारत के नागरिकों को आज भी अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही कानून व्यवस्था झेलनी पड़ रही है जिसमें सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। आज यह पहल की गई है जो की प्रशंसनीय है।
आपको बता दें कि
1. न्याय के लिए समग्र दृष्टिकोण केवल अपराधी ही नहीं बल्कि पीड़ित एवं समाज के लिए न्याय सुनीश्चित करना।2.आधुनिक जांच प्रक्रिया में तकनीक का प्रयोग करके जांच को और तेज और कुशल बनाना l3.आतंकवाद एवं संगठित अपराध से निपटना l4.गंभीर अपराध के लिए बढ़ी हुई सजा, जुर्मना एवं न्युनतम दंड का प्रावधान l5.भीड-हिंसा, साइबर- क्राइम, स्नैचिंग जैसे नए एवं अन्य उभरते अपराध के लिए प्रवाधानो का होना l6.दण्ड प्रक्रिया संहिता को अधिक सुव्यस्थित, सुगम एवं प्रवर्तनिय बनाना l7. आधुनिक भारत हेतु न्याय-केंद्रित कानून जहां महिलाओं-बच्चों एवं कामजोर वर्ग को प्रथमिकता दी गई है lउक्त कार्यक्रम के दौरान बालको के अधिकारी अरुण बिस्वाल, सुमंथ सिंह, हीरामनी शर्मा, पार्षद तरुण राठौर, पार्षद पति नारायण सिंह राजपूत, पार्षद बद्रीकीरण, विकास डालमिया, दुष्यंत शर्मा, जोशी जी, एफ डी मानिकपुरी, मांजी , रवि भाई , पवन यादव, शशि चंद्रा एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
: थाना दर्री मे नवीन कानून के सफल क्रियान्वयन हेतु जागरूकता कार्यक्रम
Mon, Jul 1, 2024
कोरबा( न्यूज उड़ान) दिनांक 01/07/2024 से नये कानून भारतीय न्याय सहिंता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को लागू किया जाना है। जिसके सफल क्रियान्वयन कि दिशा मे आम नागरिकों की सहभागिता एवं जागरूकता हेतु दंड से न्याय की ओर कार्यक्रम का थाना दर्री द्वारा आयोजन किया गया। https://youtu.be/oYG1dSvYDGM?si=E7a5dPvV85bNEQ6N जिसमे नगर पुलिस अधीक्षक दर्री श्री रविंद्र कुमार मीणा (IPS), थाना प्रभारी दर्री श्री विनोद सिंह एवं 50 की संख्या में गणमान्य नागरिक, राजनेता, जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, पत्रकारगण एवं आम नागरिक उपस्थित आये। कार्यक्रम मे नगर पुलिस अधीक्षक दर्री एवं थाना प्रभारी दर्री द्वारा नए कानूनों के तहत मुख्य निम्न बड़े बदलाव बताया गया ---01 . अंग्रेजों के समय इंडियन पीनल कोड (IPC), क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) और इंडियन एविडेंस एक्ट (IAC) बनाया गया था।
तीनों कानूनों की जगह 01 जुलाई से क्रमश: भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) प्रभावी होंगे.02 . IPC vs BNS: IPC में कुल 511 धाराएं थीं, BNS में 358 हैं. आईपीसी के तमाम प्रावधानों को भारतीय न्याय संहिता में कॉम्पैक्ट कर दिया गया है।आईपीसी के मुकाबले बीएनएस में 21 नए अपराध जोड़े गए हैं. 41 अपराध ऐसे हैं जिसमें जेल का समय बढ़ाया गया है।
82 अपराधों में जुर्माने की रकम बढ़ी है. 25 अपराध ऐसे हैं जिनमें न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है. छह तरह के अपराध पर कम्युनिटी सर्विस करनी होगी. 19 धाराएं हटाई गई हैं।03 . 01 जुलाई 2024 से सभी FIRs भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत लिखी जाएंगी।इससे पहले जो भी मुकदमे IPC, CrPC या एविडेंस एक्ट के तहत दर्ज हुए थे, वे उसी के हिसाब से चलेंगे. पुराने मामलों पर नए आपराधिक कानूनों का प्रभाव नहीं पड़ेगा।04 . नए आपराधिक कानूनों के तहत, आप कहीं से भी अपराध की शिकायत कर सकते हैं।
ऑनलाइन FIR रजिस्टर करा सकते हैं. जीरो FIR की शुरुआत हुई है जिससे कोई किसी भी पुलिस स्टेशन में, FIR दर्ज करा सकता है।05 . महिलाओं के लिए रेप पीड़ितों के बयान महिला पुलिस अधिकारी दर्ज करेंगी।इस दौरान पीड़ित के अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी जरूरी है. मेडिकल रिपोर्ट सात दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।नए कानून में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की सूचना दर्ज होने के दो महीने के भीतर जांच पूरी की जानी चाहिए।पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर अपने मामले की प्रगति के बारे में जानकारी मिल सकेगी. बच्चे को खरीदना या बेचना जघन्य अपराध माना गया है।दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है,नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए मौत की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है,वैसे मामलों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है।06 . गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि वह मदद के लिए जिसे चाहे, उसे सूचना दे सके. गिरफ्तारी की जानकारी थानों और जिला मुख्यालय में प्रमुखता से दी जाएगी।गंभीर अपराध की स्थिति में, मौके पर फॉरेंसिक टीम का जाना अनिवार्य है,आपराधिक मामलों में ट्रायल खत्म होने के 45 दिनों के भीतर फैसला सुना दिया जाना चाहिए।पहली सुनवाई के 60 दिन के भीतर आरोप तय हो जाने चाहिए. सभी राज्यों की सरकारें गवाहों की सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित करने के लिए विटनेस प्रोटेक्शन योजनाएं लागू किया जा सकता है। 07 . मुकदमेबाजी से जुड़े बदलाव मे किसी भी मामले में, आरोपी और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर एफआईआर, पुलिस रिपोर्ट, चार्जशीट, बयान, इकबालिया बयान और अन्य दस्तावेजों की कॉपी पाने का अधिकार है। मामले की सुनवाई में गैर-जरूरी देरी न हो, इसके लिए अदालतों को अधिकतम दो बार स्थगन की अनुमति होगी।08 . CrPC में 484 धाराएं थीं, BNSS में 531 हैं. CrPC की 177 धाराओं में बदलाव कर उन्हें BNSS में भी जगह दी गई है।9 धाराएं और 39 उप-धाराएं जोड़ी गई हैं. CrPC की 14 धाराओं को न्यायिक प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है.09 . एविडेंस एक्ट की जगह BSA लागू हो रहा है. 24 धाराओं में बदलाव कर BSA में कुल 170 धाराएं हैं. दो उप-धाराएं जोड़ी गई हैं और छह हटाई गई हैं। नए कानूनों का फोकस सजा देने के बजाय न्याय प्रदान करना है. साथ ही साथ पीड़ितों और आरोपियों के अधिकारों की रक्षा करना।