: गरीब बेटियों की शादी में चश्मा नहीं बनेगा बाधक।
Fri, Aug 23, 2024
कोरबा (न्यूज उड़ान )छत्तीसगढ़ की ऐसी गरीब बेटियां जिनको किसी न किसी कारण से चश्मा लग गया है और चश्मा की वजह से उनके विवाह में अड़चन आ रही है तो ऐसे परिवार को चिन्ता करने की जरूरत नहीं है।ऐसे परिवार और बेटियों को राहत देने का बीड़ा साईं बाबा आई हॉस्पिटल ने उठाया है।इस अस्पताल के संचालक डॉ. आशीष महोबिया ने बताया कि गरीब बेटियों की आंखों से नि:शुल्क चश्मा हटाने का लेजऱ (लेसिक) किया जाएगा। इस हॉस्पिटल में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग की बच्चियों के लिए नि:शुल्क चश्मा हटाने का लेसिक ऑपरेशन रोबोटिक टचलेस मशीन से करने का निर्णय लिया गया है। डॉ. महोबिया ने बताया कि इसके लिए अंत्योदय गऱीबी रेखा कार्ड एवं परिवार का आयकर दाता नहीं होना अनिवार्य है। यदि बच्चियां निर्धारित मापदंडों के दायरे में आती हैं, तो उनका ऑपरेशन पूरी तरह नि:शुल्क किया जाएगा। इनके अलावा यदि बच्चियां मध्यम वर्गीय परिवार की हंै, तो उनके लिए भी हॉस्पिटल द्वारा आधे दर पर ऑपरेशन की सुविधा प्रदान की जाएगी। डॉ. आशीष महोबिया ने बताया कि आजकल की मशीनें इतनी उन्नत हो गई हैं कि वे चश्मा हटाने के ऑपरेशन की प्रक्रिया पूरी तरह दर्द रहित कर सकती हैं। मरीज़ को कोई इंजेक्शन नहीं लगता, बल्कि ये प्रक्रिया बिना मरीज के आँखों को छुए किया जाता है। ऑपरेशन के तुरंत बाद अपने घर जा सकते है, मरीज की आँखों में पट्टी भी नहीं लगाना पड़ता है।
: कोरबा महापौर राजकिशोर प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र निरस्त, शहर की राजनीति में मचा हड़कंप!
Fri, Aug 23, 2024
कोरबा( न्यूज उड़ान )कोरबा नगर पालिक निगम के महापौर राजकिशोर प्रसाद के जाति प्रमाण पत्र को आदिम जाति विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने निरस्त कर दिया है। इस फैसले से कोरबा की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लेकिन एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है: उस समय पदस्थ एसडीएम ने स्थायी प्रमाण पत्र जारी कैसे कर दिया था? और अब, इस गलती के लिए उन पर और इसमें शामिल संबंधित कर्मियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।महापौर का भविष्य अधर में: कांग्रेस के महापौर राजकिशोर प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद शहर की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। नगर निगम चुनाव में अभी करीब 5 माह का समय बाकी है, लेकिन इस निर्णय ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या श्री प्रसाद इस स्थिति में आगामी 5 महीने तक महापौर के पद पर बने रह पाएंगे? अभी तक उनके रुख के बारे में कोई स्पष्टता नहीं आई है, क्योंकि उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, भाजपा इस मौके का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है और चाहती है कि महापौर की कुर्सी से श्री प्रसाद को हटाकर उनकी जगह भाजपा से किसी को महापौर मनोनीत किया जाए। लेकिन इस प्रक्रिया में वैधानिक और संवैधानिक अड़चनों को पार करने में 2 से 3 महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद नया महापौर भी केवल दो से ढाई महीने के लिए ही हो सकता है। राजनीतिक दांवपेच: भाजपा की ओर से महापौर पद के लिए खींचतान शुरू हो सकती है, जिससे पार्टी के भीतर विवाद उत्पन्न हो सकता है। इस बीच, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश शुरू कर दी है। यह भी संभव है कि राजनीतिक सहमति के तहत श्री प्रसाद को निगम चुनाव की आचार संहिता लागू होने तक महापौर के पद पर बने रहने दिया जाए।6 दिसंबर 2019 को कोरबा के अनुविभागीय अधिकारी ने राजकिशोर प्रसाद के पक्ष में 'कोयरी' या 'कोइरी' जाति के अन्य पिछड़ा वर्ग का स्थायी सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र जारी किया था। यह जाति बिहार प्रांत में पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आती है, लेकिन प्रमाण पत्र छत्तीसगढ़ में हरदी बाजार तहसील से जारी किया गया था, जो कि एक अस्थायी प्रमाण पत्र के आधार पर था। उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के अनुसार, विजिलेंस सेल की रिपोर्ट, गवाहों के बयान और प्रस्तुत दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि धारक अपनी सामाजिक प्रास्थिति को प्रमाणित करने में असफल रहे। इस आधार पर, समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 6 दिसंबर 2019 को जारी ‘कोयरी’ या ‘कोइरी’ जाति का स्थायी सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया जाए। कलेक्टर कोरबा को भी निर्देश दिया गया है कि वे छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 और अन्य सुसंगत प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह मामला न केवल प्रशासनिक गड़बड़ियों को उजागर करता है, बल्कि आने वाले नगर निगम चुनावों के पहले राजनीतिक दांवपेचों का भी एक संकेत है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह प्रकरण कौन सी नई राजनीतिक दिशा लेता है।
: महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन गंभीर नहीं।
Fri, Aug 23, 2024
कोरबा (न्यूज उड़ान) कोलकाता और देश के अन्य शहरों में महिलाओं, बच्चों के साथ यौन उत्पीडन की घटनाओं ने देश को झकझोर दिया है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में विशाखा गाइडलाइन जारी किया था। उक्त गाइडलाइन में महिलाओं की सुरक्षा, यौन अपराधों की रोकथाम , शिकायतो के निराकरण के लिए उपाय बताते हुए गाइडलाइन लागू करने का निर्देश दिया था। भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिलाओं का कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम 2013 लागू किया । उक्त कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए निजी और सरकारी संस्थाओं , स्कूल, कालेज, संगठनों में आंतरिक समिति का गठन नहीं किया गया है। जिला और ब्लॉक स्तर पर स्थानीय समितियां का गठन भी नहीं किया गया है जो ऐसी घटनाओं और शिकायतो की निगरानी कर सके। स्वतंत्र समिति के अभाव में महिलाए लोक लाज, भय और कानूनी अज्ञानता के कारण पीड़ित महिला पुलिस में शिकायत नहीं करती। इससे अपराधियों का उत्साह बढ़ता है। उक्त अधिनियम एवं गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसे प्रत्येक कार्यस्थल जिसमें निजी व सरकारी संस्थाएं,स्कूल, कॉलेज, संगठनों में जहां 10 या उससे अधिक महिलाएं संलग्न है एक आंतरिक समिति का गठन किया जाना अनिवार्य है। समिति का गठन नहीं होने पर पचास हजार रुपए जुर्माना का प्रावधान भी किया गया है। इन सबके बावजूद कोरबा में कहीं भी आंतरिक समिति का गठन नहीं किया गया है। जिला स्तर पर भी स्थानीय समिति का कोई अता-पता नहीं है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण न जाने कितनी यौन उत्पीडन की शिकायते दबी रह जाती होगी। जिला अधिवक्ता संघ कोरबा के सचिव नूतन सिंह ठाकुर ने
सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन और अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए सभी निजी व सरकारी संस्थाओं, स्कूल, कालेज, संगठनों में तत्काल आंतरिक समिति का गठन करने के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोरबा को पत्र लिखा है। जिसमें कलेक्टर कोरबा को महिलाओं की सुरक्षा के लिए कार्यवाही करने हेतु निर्देश जारी करने का निवेदन किया है।